Xerox copy
(n) - छाया प्रति , फोटो प्रति
The xerox copies of the certificates may be enclosed with the application. आवेदन के साथ प्रमाण पत्रों की छाया प्रतियाँ भी सलंग्न करें।
ज़ेरॉक्स मशीन (Xerox Machine) या फोटोकॉपी मशीन का अविष्कार चेस्टर कार्लसन (Chester Carlson) जी के द्वारा 22 अक्टूबर सन 1938 में किया गया था. जोकि एक part-time researcher और inventor थे, उन्होंने ज़ेरॉक्स मशीन को 1938 में बना लिया था. लेकिन इसका commercial use 1959 से शुरू हुआ था.
शुरू में ज़ेरॉक्स मशीन का नाम electrophotography था, लेकिन यह नाम थोडा अटपटा और complicated था. इसलिए इसका नाम बदल कर Xerox कर दिया गया, जिसका Greek भाषा में मतलब था “dry writing”.
दुनिया की पहली फोटोकॉपी मशीन का आविष्कार चेस्टर कार्लसन ने साल 1959 में किया था। इस काम में उनके इंजीनियर दोस्त ऑटो कॉरनेई ने भी उनकी मदद की थी।
जेरॉक्स 914 का यह नाम इसलिए रखा गया था, क्योंकि यह 9 इंच/14 इंच तक की माप वाले कागजों की कॉपी कर सकती थी। यह मशीन एक कॉपी 26.4 सेकेंड्स में करती थी।
इस मशीन की एक कमी यह थी कि यह बहुत ज्यादा गर्म हो जाने पर आग पकड़ लेती थी।
तुम्हें शायद यह जानकर हैरानी हो कि जेरॉक्स मशीन की इस कमी की वजह से कंपनी मशीन के साथ ही खरीदारों को एक छोटा सा आग बुझाने का यंत्र भी देती थी।
इन कमियों के बाद भी उस वक्त इस मशीन को लोगों ने खूब पसंद किया, क्योंकि इससे पहले ऐसी कोई मशीन नहीं बनी थी और यह उनके काम को आसान बना रही थी। इसके बाद इस मशीन में बदलाव होते गए और इसकी कमियां दूर होती गईं।
यह एक electrically charged photoconductive insulating surface पर light के action के द्वारा graphics material की photocopy (प्रतिलिपि) बनाता है. इस मशीन में एक तरह का black powder होता है जिसकी इस्तेमाल करके ज़ेरॉक्स मशीन दुसरे कागज पर documents या images को same to same उतार देता है.
ज़ेरॉक्स मशीन कैसे काम करता है
जिस किसी भी document को copy करना होता सबसे पहले उस document को xerox machine में सबसे ऊपर लगे ग्लास पर रखा जाता है. उसके बाद नीचे से एक light आती है जो उस पुरे document को scan करती है.
स्कैन करते टाइम कागज के जिस भी हिस्से पर कुछ भी लिखा होता है. उस हिस्से से light reflect होकर नीचे लगे एक ड्रम पर पड़ती है. जिसके बाद ड्रम सिर्फ कागज पर लिखे या बने उन्ही हिस्सों से आई light को observe करता है.
जिस हिस्से पर कुछ लिखा हुआ हो या फिर बना हुआ हो, जैसे जैसे लाइट कागज को स्कैन करती जाती है. ठीक उसी तरह से ड्रम भी नीचे घूमता रहता है, जिससे की कागज पर बने हर एक अक्षर या चित्र को पेटर्न ड्रम पर बन जाता है.
ड्रम के साथ ही xerox machine के अन्दर एक टोनर लगा होता है, जिसमे की powder भरा होता है. आप ने अक्सर photocopy करने वाले इंसान को ज़ेरॉक्स मशीन के अन्दर से एक पार्ट निकाल कर उसमे black powder भरते हुए देखा होगा.
यह ब्लैक पाउडर ड्रम पर उभरे अक्षरों और आकृतियों के साथ चिपक जाता है. जब white paper ज़ेरॉक्स मशीन के अन्दर जाता है और वह ड्रम और रोलर के बिच से दबते हुए गुजरता है.
तो ड्रम के ऊपर चिपका हुआ ब्लैक पाउडर वाइट पेपर पर चिपक जाता है. इस दौरान कागज को heat भी दिया जाता है जिससे की इंक कागज पर परमानेंट के लिए चिपक जाता है.
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